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RaJ


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एक दिया कहीं दूर जला दिया

Posted On: 2 Feb, 2014 Others,कविता में

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जाना था कहीं दूर तो यूँ ही कह दिया होता
रुखसत लेने के लिए भी हमको बुला लिया
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न था कोई मतलब उनको मेरे जज्बात से
ये बताने के लिए भी एक ख़त लिख दिया
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कुछ भी न लेना देना था उसको मेरे सफ़र से
ये बताने के लिए भी वह मेरे साथ कुछ दूर तक गया
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दफन हो गए थे अपने रिश्ते ज़माने से
इसका जिक्र भी उसने फेस बुक पर कल रात को किया
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शोले पे रख राख़ डालकर बुझने को छोड़ते
हवाओं को इशारा तुमने इस ओर का किया

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सर्द बर्फीली जमती फ़िज़ाओं में हम रहने लगे थे
एक दिया कहीं दूर जला दिया
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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
February 5, 2014

अद्भुत बहुत खूबसूरत गजल आदरणीय राज जी

    RaJ के द्वारा
    February 15, 2014

    धन्यवाद दीपक जी

sanjay kumar garg के द्वारा
February 3, 2014

राज जी, नमस्कार सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई!

    RaJ के द्वारा
    February 3, 2014

    गर्ग साहब दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
February 3, 2014

बढ़िया राज जी सुन्दर प्रस्तुति बधाई

    RaJ के द्वारा
    February 3, 2014

    प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद निशा जी


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