Reality and Mirage of Life

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RaJ


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इंसानियत का नशा,,,,,,,,,,,

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इंसानियत का करो  नशा ________duckkitty

रास्ते में फेंकी बीड़ी पाई ; पहली बार ओंठों से लगाई ।

:

शुरू हुआ झूठी बीड़ी से ; चढने लगा नशा सीढ़ी से ।

:

हुआ प्रामोसन पाई “क्रैक”; करता  रहा उसी से ऐश ।

:

एक रोज तो गज़ब हो गया ; चिलम से मेरा मिलन हो गया ।

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ब्रेन का मेरे “लॉक” खुल गया ; जन्नत सा माहोल हो गया ।

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मारता रहा मैं कश पे कश ; आँखे टंग गई, खा गया गश ।
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अंदाज़ हो गया नशा नशीला ; बदन हो गया सारा ढीला ।

:

अब हूँ बेबस , जेब है खाली  ; नशा मिले तो  खेलूं पाली ।
;

जीवन का सब मजा  खो  गया ; नशा ही अपना खास हो गया ।

:

नशा अगर कुछ  अलग ही होता ; अपने को में यूँ  न खोता ।

:

नशा सत्य की खोज का होता ; गाँधी सा व्यक्तित्व निखरता ।

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आविष्कार का नशा जो होता ; एडिसन का  “वल्व ” दमकता ।

:

छोड़ो  बीड़ी, चिलम, चटारी ;  सेहत पर ये पड़ेगा भारी ।

:

मानवता का काम  करो तुम ; इन्सान बनो , इंसानियत नशा करो तुम ।

:

Buterfly



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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
January 2, 2013

राजभाई नमस्कार हमारे शहर के स्टेशन पर हर खंभे के साथ एक बोर्ड लगाया हुआ होता था । उसमें दारुकी बोतल दिखाई गई थी । सुत्र लिखा हुआ होता था ” तू क्या पीयेगा इसे, यही तूझे पी जायेगा ” । आदमी सिगरेट या सराब नही पिता है बल्की सिगरेट शराब आदमी को पी जाते हैं । तन, मन और धन से कंगाल कर देते हैं । आप की कविता का सार भी यही है । आप की कविता पढकर बचपनमें देखे वो शराबवाले बोर्ड याद आ गये ।

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 16, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें. आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को ! मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

    RaJ के द्वारा
    December 7, 2012

    धन्यवाद मदन मोहन जी आपकी सार्थक रचनाओ को पढ़ा जो बड़ी ही प्रभावशाली हैं |

Lahar के द्वारा
November 11, 2012

आदरणीय raj जी सप्रेम नमस्कार कविता तो हास्यरस से सरोबोर है….लेकिन एक अच्छी सीख के साथ…

    RaJ के द्वारा
    November 13, 2012

    लहर जी धन्यवाद अच्छे शब्दों से नवाज़ने के लिए |

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 10, 2012

उम्दा

    RaJ के द्वारा
    November 13, 2012

    धन्यवाद यतीन्द्र जी

satya sheel agrawal के द्वारा
November 10, 2012

राज जी क्या बात है.कविता के माध्यम से इंसानियत का सन्देश ,सुन्दर.

    RAJEEV के द्वारा
    November 10, 2012

    आदरणीय सत्य शील अग्रवाल जी बहुत बहुत धन्यवाद

akraktale के द्वारा
November 9, 2012

आदरणीय राज साहब                            सादर, बहुत ही लंबे अंतराल के बाद एक सार्थक संदेशात्मक और मनोरंजक रचना ले कर उपस्थिति मन गद गद हो गया. बधाई स्वीकारें.

    RaJ के द्वारा
    November 9, 2012

    अशोक जी अहसान मंद हूँ कि मेरे जैसे थोडा बहुत लिखने वाले कि अनुपस्थिति को आपने महसूस किया . इस रचना को गौर करने के लिए धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
November 8, 2012

बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश.किस प्रकार इंसान पतित होता है.बहुत अच्छा प्रस्तुतीकरण

    RaJ के द्वारा
    November 8, 2012

    शुक्रिया हौसला अफजाई के लिए निशा जी


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