Reality and Mirage of Life

Be a huamn is better than godman

62 Posts

585 comments

RaJ


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 441 postid : 432

चक्रव्यहू में अभिमन्यु

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ANNAimages

आज शायद स्वाधीन भारत के इतिहास का काला पन्ना साबित होने जा रहा है| ४२ साल से लोकतंत्र में मक्कारी करने वाले, एक सच्चे भारतीय को जो एम् एम् आर डी ऐ मैदान में भूखा प्यासा और निमोनिया के कारण १०४ डिग्री तप रहा है उस व्यक्ति को, राजीनीतिक कुचक्र से कुचलने जा रहे हैं | जिसके लिए यह व्यक्ति रोज़ अपनी जान लगा रहा है, यह शर्म की बात है कि यहाँ का अवाम सो रहा है | अन्ना को शायद यह ध्यान नहीं रहा होगा कि गाँधी को अंग्रेजों के सामने अनशन करना था जोकि आजके नेताओं से जिन्हें हम ही से चुनवा लिया जाता है, धोके से और दबंगई से, कही ज्यादा निक्रष्ट है | यही कहा जा सकता है कि इस समय यहाँ का युवा खून पानी हो गया वर्ना यूँ ही यह खून का घूंट न पी जाते | यह एक निर्णायक मोड़ भारत के सामने आ खड़ा हुआ चूँकि इस तरह का माहोल कई दशक में आया है जब भारतीय जनता किसी सर्वमान्य नेतृत्व को स्वीकार कर आगे बढ रहा था | इस आन्दोलन का राजनितिक कुचक्र में बिखर जाना अब इस बात को तय करेगा कि लम्बे समय के लिए हम उसी भ्रष्ट सिस्टम मेंरहने को तैयार रहे जिसे आज़ादी के बाद से भुगतते रहे है | राजनितिक जमात ने जो खेल तमाशा संसद और बैठकों में दिखाया उससे साफ़ है कि वे अपने खिलाफ ऐसा बिल कैसे ले आयें जिसके आती ही सारे सांसद और मंत्री जेलों में जाने को मजबूर हा जाएँ | लोगों कि बेशर्मी ही होगी कि वे अन्ना जोकि उनकी लड़ाई लड़ रहा है उसको जब नीचता कि हद पर चुके नेता गाली दे रहे हैं तो वे नए साल का जश्न मनाये | मरे जमीरों के बीच अन्ना ने यह बड़ी भूल की वह यहाँ अलख जलने चले आये | जो समाज खुद इस समय घर में बैठकर अपने लिए दूसरों से लड़ने की आशा रख रहा है उसकी आने वाली पीडिया इसे भुगतेंगी | यहाँ के नौनिहाल आजके युवा की तरह नौकरी न मिलने पर आत्म हत्या को मजबूर होगे | किसान अपने ही खेत पर कीटनाशक खाकर मर जायेगा | सरकारी पक्ष में नपुंसक नेताओं का काम वहां राजकुमार की हर भाव भंगिमा के अनुसार हाँ हजुरी में लग जाना है यही उनका राजनितिक धर्म है | आज की राजनितिक बिरादरी अपने को अभिजात्य मानती है उनका जनता को आदर करने कोई इरादा नहीं है | यहाँ सारे अधिकार नेताओं के हैं | एक चांटा यदि भ्रष्ट बहुदे नेता को पड़ जाये तो संसद से लेकर पूरे हिंदुस्तान में उसे लोकतंत्र पर हमला मान लिया जाता और भर्तसना पर भर्तसना शुरू हो जाती है | आम आदमी अपनी मांग लेकर जाती है तो नेताओं के गुंडे मार मार कर अधमरा कर देते है, तब किसी के पेट में इतना दर्द नहीं होता | राजनितिक गल्यारों में औरतों का इस्तेमाल चारे तरह हो रहा है और कितनी भंवरी जाने कहाँ किन परिस्थ्तिओं क़त्ल हो रही हैं | आम आदमी रोज़ उन लोगों की कबड्डी देखने को मजबूर हैं जो पैसे और बहुबल से पहले खुद को चुन्वाते हैं फिर अपनी हैसियत ओहदे को सविधान से जोड़कर आम जनता को हडकाते दिखाई देते हैं | किसी राजनितिक पार्टी को इस समय भ्रष्टाचार से लड़ने की नहीं अपनी अपनी चालों से सत्ता सुख भोगने की चाह है | जब अपने भत्ते बडवना हो या अपनी तनख्वाह और जिंदगी भर पेंसन की व्यवस्था जनता की जेब डाका डालकर करना हो तो गज़ब का भाईचारा सभी सांसद विधायक दिखाते हैं | चक्रव्यहू में फंसकर जन लोकपाल अभिमन्यु की तरह कल की सुबह नहीं देख पायेगा और सभी उस समय के धरतीपुत्र , गुरु द्रोण और आज के हम जैसे निष्क्रिय किंकर्तव्य विमूड लोग खड़े खड़े तमाशा देखते रहेंगे |



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

21 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
January 1, 2012

आदरणीय राज जी, सादर ! निराशा नहीं ! अधैर्य नहीं ! हिम्मत कम नहीं होनी चाहिए ! शारीर की मजबूती से कुछ नहीं होता, दिल मज़बूत होना चाहिए और अन्ना के साथ साथ जनता का दिल बेहद मज़बूत है. बदलाव आने में देर होता है, पर होगा जरूर !

    RaJ के द्वारा
    January 1, 2012

    मैं आपके आशावाद की कद्र करता हूँ और यदि विचार यूँ ही बना रहा तो मंजिल मिलनी ही है ……शशि जी बहुत बहुत धन्यवाद

minujha के द्वारा
December 31, 2011

राज जी सही लिखा आपने,खुद तो अपने अधिकारों के लिए लङने का माद्दा हम रखते ही नही और कोई दूसरा हमारे लिए खङा होता है तो उसके  समर्थन में भी असमर्थतता दिखा देते है बहुत सटीक आलेख

    RaJ के द्वारा
    January 1, 2012

    मीनू जी प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
December 30, 2011

हाँ, हमें अब जागना होगा और जगाना होगा। इस तरह की रचनायें इसमें सहभागी बनेंगी।।

    RaJ के द्वारा
    December 30, 2011

    दिनेशजी नववर्ष मंगलमय हो जागरूकता वैसे हर बीमारी का ही इलाज है धन्यवाद |

mparveen के द्वारा
December 29, 2011

राज जी नमस्कार, बिलकुल वास्तविकता को दिखता आपका आलेख . आज जब एक बुजुर्ग हमारे लिए लड़ रहा है और किस्से लड़ रहा है हमारे द्वारा चुने गए नेताओं से , किसके लिए लड़ रहा है – हमारे लिए न फिर हम क्यूँ सोये हुए हैं अभी तक . अगर इसी तरह जनता को अपनी राजनितिक शक्ति से कुचलन है सरकार को तो फिर लोकतंत्र कहाँ रह गया है ??? धन्यवाद … http://mparveen.jagranjunction.com/2011/12/25/%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA/

    RaJ के द्वारा
    December 30, 2011

    आपके कमेन्ट निश्चित ही आक्रोश से bhare बिलकुल यथार्थ को saprsh करते हुए हैं

akraktale के द्वारा
December 28, 2011

राज जी नमस्कार, मन का उद्वेलित होना स्वाभाविक ही है.यह विडंबना ही है की हम अपने भले बुरे हो खुद ही नहीं समझ रहे हैं. लोगों को लगता है की जब साठ वर्ष से अधिक ऐसे ही निकल गए तो और साथ वर्ष निकल ही जायेंगे. पिछले साठ वर्षों की उपलब्धी में हमने बी पी एल जैसा वर्ग समाज में पाया है तो आने वाले वर्षों में बी बी पी एल वर्ग भी पा लेंगे मगर भ्रष्ट तंत्र से नहीं लड़ेंगे. सरकारी पक्ष में नपुंसक नेताओं का काम वहां राजकुमार की हर भाव भंगिमा के अनुसार हाँ हजुरी में लग जाना है यही उनका राजनितिक धर्म है | सराहनीय आलेख.

    raj के द्वारा
    December 28, 2011

    हाँ गंभीर विषय स्वतंत्र भारत की स्वतंत्रता विषमता को बढ़ा ही रही है

    raj के द्वारा
    December 28, 2011

    धन्यवाद रक्ताले साहब

sadhanathakur के द्वारा
December 28, 2011

राज भाई ,बहुत हद तक सही पकड़ लिए आपका लेख बहुत अच्छा लगा ……

    raj के द्वारा
    December 28, 2011

    अच्छा लगा आपने लेख को ध्यान दिया व प्रोत्साहन दिया , धन्यवाद साधना जी

Amita Srivastava के द्वारा
December 28, 2011

राज जी नमस्कार एक अच्छा और जनचेतना जगता हुआ आलेख बधाई

    raj के द्वारा
    December 28, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
December 28, 2011

युग युग से यही हो रहा है आगे भी !!! बहुत बधाई

    raj के द्वारा
    December 28, 2011

    हाँ एक हद तक सैकड़ों वर्ष किसी न किसी आक्रमण कारी के आधीन रही भारत भूमि वन्शानुगति रूप से इसी का शिकार हो गयी लगती है अतः स्वतंत्र चिंतन को नहीं अपना पाती| पीढ़ी दर पीढ़ी चापलूसी का चलन राजनीती और अफसर साही का चलन है शुक्रिया मनोरंजन भाई

abodhbaalak के द्वारा
December 28, 2011

राज जी आशा है की ये अभिमन्यु इस बार इस चक्रव्यूह को भेद कर ………….. इस बार जनता चुप नहीं है, और वो देख रही है और सिर्फ देख ही नहीं वरन साथ में कड़ी भी ……………. सराहनीय लेख http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    RaJ के द्वारा
    December 28, 2011

    अबोध जी आपका बोध hamesha की तरह प्राप्त हुआ bilkul ठीक hai yadi जनता अब सो gayee to yah kalank varman युवा को जायेगा जिसकी आने वाली पीड़ी भ्रष्टाचार के दानव आगे त्राहि त्राहि करेगी bhukh नग्नता का तांडव hoga अस्मिता चौराहे पर neelam ho जाएगी sarahana के liye dhanyavad

bharodiya के द्वारा
December 28, 2011

आप को ऐसा नही लगता की भारत भूमि के पानी में ही खराबी है । बिना पानी की औलादें पैदा किये जा रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता भैंस के समान हो गई है । पिछली बार अन्ना मुश्किल से उसे पानी के बाहर लाये थे । आज फिर पानी में बैठ गई । आप को ऐसा नही लगता की जनता गधे के समान हो गई है । रात दिन गधे की तरह काम करो, मेहंगाई, घूस देने के लिए थोडा और काम कर लो । दिन कट जाएंगे । आप को ऐसा नही लगता की जनता कुत्ते के समान हो गई है । मालिक बिस्किट फैंकता है तो कुत्ते सी वफादारी दिखने दौडता है । आज दिखा दिया कुत्तापन, अन्ना को कले झंडे दिखा कर । चायना में जब राजाशाही थी तब एक राजा मर गया । उस के ५ साल के बच्चे को राजा बना दिया । उस बालाराजा को ईत्र से भरे बर्तन में संडस आदी करवाया जाता था । बर्तन दरबार में धुमाया जाता था । सब दरबारी उसे सुंघते थे और अपनी वफादारी दिखाते थे । आप को ऐसा नही लगता की भारत का भी ऐसा ही हाल है । जनता जवाहरलाल के बच्चों का सब कुछ सुंघ रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता गुलाम है और उसे गुलाम ही रहने देना चाहिये । गुलामी के लायक ही है ।

    RaJ के द्वारा
    December 28, 2011

    भदौरिया जी आपकी बेबाक टिपण्णी से आपकी परिपक्व soch का पता लगा साथ ही आप जैसे लोगो की समाज में शिरकत इसका भी पता लगा बहुत बहुत धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran