Reality and Mirage of Life

Be a huamn is better than godman

63 Posts

589 comments

RaJ


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

Hello world!

Posted On: 14 Feb, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

एक दिया कहीं दूर जला दिया

Posted On: 2 Feb, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others कविता में

6 Comments

कितनी अराजक है ‘आप’ की नीति ? जागरण जंक्शन फोरम

Posted On: 27 Jan, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Junction Forum में

8 Comments

इंसानियत का नशा,,,,,,,,,,,

Posted On: 7 Nov, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others बिज़नेस कोच लोकल टिकेट में

13 Comments

अरविन्द निकाल दे इस कीड़े को

Posted On: 2 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

21 Comments

कायदों का शहर _____

Posted On: 22 Apr, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

32 Comments

उजड़ता आशियाना …….

Posted On: 30 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

20 Comments

जो आज सोयेगे – कल अपने बच्चो को मिस्र देंगे- jagran junction forum

Posted On: 2 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

21 Comments

नयी साल का रेसोलुशन

Posted On: 31 Dec, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

19 Comments

Page 1 of 712345»...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा:

के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

वर्त्तमान में सरकारे लगभग अंग्रेजों के हुकूमत करने के ढर्रे पर चलने लगी है | जैसे काले गोरों का फर्क था अब शाषकों और जनता में फर्क है | सारी सड़कें जैसे इनकी ही हों जब चाहें लाल बत्ती कि दम पर ट्राफिक बंद कराकर दनादन अपने सैकड़ों वाहनों के साथ निकल जाये तो क्या यह अराजकता नहीं है | क्या अगली बार जब आर टी ओ कार्यालय में बार बार जाने पर जब बिना रिश्वत के कुछ काम न हो और आप अपना आपा खो दें चीखे चिल्लाये लोग इकठा हो जाये , एक ऑफिस जो व्यवथा बनाकर रिश्वत खोरी कर रहा हो वहाँ आप इसके खिलाफ अव्यवस्था फैला दें | बहुत सम्भव है कि कई लोग इसे अराजकता कहेंगे और खुद यह कहेंगे कि पञ्च सौ सात सौ रूपये रिश्वत देकर झंझट से बच जाएँ अव्यवस्था न हो | शालिनी जी आप अधिवक्ता हैं इन राज़ रोज़ के भृष्टाचार के शिष्टाचार मुझसे ज्यादा अच्छा जानती होंगी बहुत धन्यवाद

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

कुछ आहट सी हो रही है, भ्रष्टाचारी, आतंकवादी, बलात्कारी ..... आदि आ रहे हैं ... मैं भी अपने घर के दरवाजे बंद करता हूँ.... टी वी में ख़बरें आ रही है .... उसी बुद्धू बक्से से दुन्य देख लूँगा, फिर आंखे बंदकर सोने का नाटक करूंगा! कल काम पर भी तो जाना है. उसी तंत्र का हिस्सा बनने! जो होता है कहते हैं, अच्छे के लिए ही होता है ! अब भी अनगिनत मांएं अपने सपूतों के सर सहला रही हैं, पैदा करने से बाज नहीं आ रही सपूतों को.... पूत कपूत तो क्या धन संचै, पूत सपूत तो क्या धन संचै! चादर खींच कर मुंह भी ढँक लेता हूँ. कान पर दोनों हाथ रखकर न सुनने की कोशिश कर रहा हूँ..... अरविन्द जग गया है ... लगता है, नई जोश नई स्फूर्ति के साथ फिर आयेगा सामने ... समर्थन तो चाहिए होगा.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

आप को ऐसा नही लगता की भारत भूमि के पानी में ही खराबी है । बिना पानी की औलादें पैदा किये जा रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता भैंस के समान हो गई है । पिछली बार अन्ना मुश्किल से उसे पानी के बाहर लाये थे । आज फिर पानी में बैठ गई । आप को ऐसा नही लगता की जनता गधे के समान हो गई है । रात दिन गधे की तरह काम करो, मेहंगाई, घूस देने के लिए थोडा और काम कर लो । दिन कट जाएंगे । आप को ऐसा नही लगता की जनता कुत्ते के समान हो गई है । मालिक बिस्किट फैंकता है तो कुत्ते सी वफादारी दिखने दौडता है । आज दिखा दिया कुत्तापन, अन्ना को कले झंडे दिखा कर । चायना में जब राजाशाही थी तब एक राजा मर गया । उस के ५ साल के बच्चे को राजा बना दिया । उस बालाराजा को ईत्र से भरे बर्तन में संडस आदी करवाया जाता था । बर्तन दरबार में धुमाया जाता था । सब दरबारी उसे सुंघते थे और अपनी वफादारी दिखाते थे । आप को ऐसा नही लगता की भारत का भी ऐसा ही हाल है । जनता जवाहरलाल के बच्चों का सब कुछ सुंघ रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता गुलाम है और उसे गुलाम ही रहने देना चाहिये । गुलामी के लायक ही है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: राही अंजान राही अंजान

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

सार्थक लेख सटीक बातें बेबाक राज जी ...अन्ना जी चाहे गांधी हों या न हों आज एक व्यक्ति सामने तो आया अपनी जान दांव पर लगाया सरकार भी जिसे गौर से परख रही अभी तक डंडा नहीं चला कुछ तो है लोग तो आरोप प्रत्यारोप करते ही रहते हैं जिसकी जान दांव पर लगी हो किडनी ख़राब हो सकती साँसे बंद हो सकती उस पर लोग विश्वास न कर कुछ कहें तो दर्द तो होता है ...एक अच्छे काम में सब को शामिल होना चाहिए आइये सब मिल आवाज बुलंद करते रहें भ्रमर ५ पर एक स्वतंत्र देश में जहाँ कोई व्यवस्था है वहां व्यक्तिगत अधिकारों की अवहेलना आज भी होगी | बात मनवाने के लिए भीड़ यूँ ही जुटानी पड़ी, एक वयो वृद्ध को संवेदना जुटाने केलिए अपनी जान को लगाना पढ़ जाये तो शर्म सरकार को ही नहीं सोई हुई जनता को भी आनी चाहिए |

के द्वारा:

आदरणीय राज जी, सादर अभिवादन ! आपकी रचना का इंतज़ार रहता है और आप हर बार उन उम्मीदों से बेहतर कर देते हो । हालांकि इस बार इंतज़ार थोड़ा लंबा खिंच गया लेकिन परिणाम फिर वही....दिल खुश हो गया पंक्तियों को पढ़कर । इन पंक्तियों ने मुझे "दुष्यंत कुमार जी" की याद दिला दी । उनकी कुछ पंक्तियाँ मैं आपके इस प्रयास को समर्पित करना चाहूँगा.... . हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !! . . बहुत-बहुत आभार आपका !! :)

के द्वारा: संदीप कौशिक संदीप कौशिक

के द्वारा: RaJ RaJ

प्रिय राजीव भाई बहुत ही विचारणीय प्रश्न और सुन्दर विषय युक्त आलेख जब तक जेब भरने का सिला यों ही चलता रहेगा उस पर अंकुश नहीं लगेगा एक तरफ भूखे दूसरी तरफ पकवान खा सब कुछ डकारते लोग रहेंगे किसको फुर्सत होगी देश भक्ति और जान माल की सुरक्षा की जब आराम से घर बैठे कमाई हो जाये तो कौन जाये इंटेलिजेंस में माथा खपा मरने के लिए बहुत सी जड़ें काटनी होंगी तब बात बनेगी यहाँ लड़ाई दो स्तरों पर लड़ी जानी एक उनसे जो लोग बहार से आकर लाशें बिछते रहते है और दुसरे हमारे अपने लोग है जिन्हें हमारे मतदान के ड्रामा के साथ चुना जाता है और वे हमारे हुक्मरान बनके हमें लुटते खसोटते है विचारणीय लेख बधाई भ्रमर ५

के द्वारा:

के द्वारा: anoop pandey anoop pandey

के द्वारा: Tamanna Tamanna

के द्वारा:

आदरणीय राज जी, सादर अभिवादन !! जैसा कि आपने भी कहा और मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि सत्य साई जी ने मानवता के लिए कई कार्य किए लेकिन स्वयं को भगवान बताकर और फिर इस बात को सिद्ध करने के लिए उन्होने जिस तरह से छल-प्रपंच, जादू एवं टोटकों का सहारा लिया वह वास्तव में निंदनीय है | अगर कोई सच में भगवान है तो फिर उसे इस तरह के क्रिया-कलापों का सहारा लेकर लोगों को मूर्ख बनाने की एवं उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने कि क्या आवश्यकता है ?? और फिर ऊपर से हमारी ये भोली भाली जनता....जो सच्चाई और बनावटीपन में फर्क नहीं कर सकती | आज जबकि ओर हम सब 21वीं सदी में जीने की बात कर रहें हैं, इस वैज्ञानिक युग में तरक्की की बात कर रहें हैं तो दूसरी ओर हमारा धार्मिक ( या यूं कहें कि आध्यात्मिक या भावनात्मक ) पक्ष इतना कमजोर क्यों है कि हम किसी साधारण आदमी को भगवान मान लेते हैं ?? आखिर इस सूचना-क्रान्ति के युग एवं तेजी से बदलते परिवेश में इतनी अंधी श्रद्धा का क्या औचित्य है जबकि वह सिर्फ एक विवाद-विषय के सिवा हमें कुछ नहीं दे सकती !! आभार सहित http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/

के द्वारा: संदीप कौशिक संदीप कौशिक

आपने बिलकुल ठीक कहा कि जो कुछ मनुष्य के अन्दर है उसे वह बहार ढूंढ़ रहा है | जो चीज बिना लोगों को गुमराह किये की जाये वह ज्यादा अच्छी है | डा प्रकाश आमटे जैसे लोगों ने धर्म को आगे करके न तो करोणों अरबों रूपये इकठे किये न ही खुद ऐशो आराम किया पर जो लोग उन्हें जानते है उन्होंने गोंड जनजाति को नेस्तनाबूद होने से बचा लिया | उन्हें जंगल से बहार समाज देखने के लिए आँखे दी | वे कपडे भी पूरी तरह नहीं पहनते थे उन्हें रहना सहना सिखाया चिकित्सा उपलब्ध कराई | इस सफ़र में उनका खुद का पुत्र मलेरिया ग्रस्त हो मौत का निवाला बन गया | पर डा दम्पति आज भी लगे है अपने उद्देश्य लगे है | पब्लिक को यहाँ कोई जादू देखने को नहीं मिलता कोई स्वर्ग नरक की बाते भी नहीं की जाती कोई कहानिया आशीर्वाद नहीं कोई पीछे घुमने वाला पहिया भी नहीं इसलिए कितने लोग जानते है ऐसे कामों को |

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा:

के द्वारा: RaJ RaJ

जिनके पास किसी तरह से धन संपत्ति आ गयी है वह झमेले में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि उसको लगता है बेकार में क्यों फंसो जब देश चलाने वाले नेता और उच्चाधिकारी ही इतने भ्रष्ट हैं तो शिकायत कौन सुनेगा ? व्यवस्था पर पूर्ण अविश्वास की स्थिति है समाज में . इसलिए आर टी आई के आधार पर न्याय मांगना किसी हद तक तो इस भ्रष्ट तंत्र में स्वीकार्य होता है पर एक सीमा के बाद भ्रष्ट तंत्र आपको मृत्यु दंड दे ही देता है . यही स्थिति लगभग सभी कानूनी प्रावधानों के साथ है. ऍफ़ आई आर लिखाना तक मुश्किल होता है . तब सवाल है कि करें क्या ? कब घिसटते रहें इस तरह ? क्या चुप बाते रहें . नहीं! बिलकुल नहीं ! हमें आवाज़ से आवाज़ जोड़नी होगी, एक आन्दोलन खडा करना होगा व्यवस्था परिवर्तन के लिए . ..

के द्वारा:

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

मिश्रा जी धन्यवाद मैं जानता हूँ आलोचना करने वाला लेख को ज्यादा ध्यान से पड़ता है न कि प्रशंषा करने वाला अंध विश्वास व अंध श्रद्धा मैं अंतर मामूली है | आस्था वान होना अपने मैं बहुत बड़ा गुण है और जीवन को सरलता सुगमता से जीने का साधन भी | पर आस्था व्यक्ति दिमाग को तर्कों से दूर रखकर ही पैदा की जा सकती है | सुकरात को हमेशा परेशान व समस्याओं से घिरा देखकर व उनकी बैचेनी से उनके दोस्त सूअर के दिखाकर समझाने लगे कि तमाम गन्दगी मैं भी यह प्राणी कितना प्रसन्न है | सुकरात ने उनसे यही कहा कि मैं मन मैं अपने चिंतन से हमेशा परेशान हूँ पर बिना विचार वाली जिंदगी चाहे जितनी आराम वाली हो मुझे एक पल भी नहीं चाहिए | स्वदेश का अर्थ यदि अर्थव्यवस्था बाहरी प्रभाव मुक्त करने का है तो यह आत्मघाती होगा| बहार कि चीजो का स्थानीय विरोध व योग बहार बेचने का प्रोग्राम क्या दोहरे मापदंडो का परिचायक नहीं है | कोटि कोटि धन्यवाद

के द्वारा:

बाबा रामदेव के नाम पर जागरण जंक्शन पर डाली गयी पोस्टें तुरंत हिट हो जा रही है । आपने भी बहती गंगा में मुंह हाथ घो लिया । बधाई । ये भारत के किस कानून में लिखा हुआ है कि कोई बाबा चुनाव नहीं लड़ सकता है । आपकी कलम तब तो लड़ सकता है । चुनाव लड़ना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है जैसे कि वोट देना । रामदेव जी के राजनीति में आने से बहुत लोगो को हार्दिक कष्ट हो रहा है लेकिन जब तमाम गुंडों और माफियों ने राजनीति का टिकट कटवाया था तब किसी ने चूं तक नहीं की थी । आपको शायद याद नहीं होगा । पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ रामदेव ने ही भारत की जनता से अपील की थी कि अपराधिक छवि वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट न दें । यह अपील किसी भी राजनैतिक पार्टी की तरफ से नहीं की गयी थी क्योंकि हर पार्टी में दागदार, अपराधिक छवि के नेता विराजते हैं । और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ एक रामदेवजी की अपील से इस लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुकाबले 25 प्रतिशत अपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या में कमी आयी है । जिसकी अपील इतनी कारगर साबित हुयी है अगर वह खुद राजनीति का कीचड़ साफ करने उतरता है तो इसमें किसी समझदार भारतीय को आपत्ति नहीं होनी चाहिये । एक मामला और रामदेव जी ने पिछले लोकसभा चुनाव मे उठाया था । विदेशी बैंकों में जमा काले धन का । बाद मे बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया । बीजेपी चुनाव हार गयी और वह यह मुद्दा भी भूल गयी लेकिन रामदेवजी यह बात नहीं भूले थे । पिछले साल विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत लाने के लिये बाबा ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में पी आई एल दाखिल की जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है । इस वक्त बाबा से वही लोग डर रहे हैं जिनका पैसा विदेशी बैकों में जमा है या फिर जो बाबा के राजनीति में आने पर अपनी सड़ी हुयी राजनीति का बंटाधार होते हुये देख रहे हैं ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra

बाबा रामदेव के नाम पर जागरण जंक्शन पर डाली गयी पोस्टें तुरंत हिट हो जा रही है । आपने भी बहती गंगा में मुंह हाथ घो लिया । बधाई । ये भारत के किस कानून में लिखा हुआ है कि कोई बाबा चुनाव नहीं लड़ सकता है । आपकी कलम तब तो लड़ सकता है । चुनाव लड़ना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है जैसे कि वोट देना । रामदेव जी के राजनीति में आने से बहुत लोगो को हार्दिक कष्ट हो रहा है लेकिन जब तमाम गुंडों और माफियों ने राजनीति का टिकट कटवाया था तब किसी ने चूं तक नहीं की थी । आपको शायद याद नहीं होगा । पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ रामदेव ने ही भारत की जनता से अपील की थी कि अपराधिक छवि वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट न दें । यह अपील किसी भी राजनैतिक पार्टी की तरफ से नहीं की गयी थी क्योंकि हर पार्टी में दागदार, अपराधिक छवि के नेता विराजते हैं । और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ एक रामदेवजी की अपील से इस लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुकाबले 25 प्रतिशत अपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या में कमी आयी है । जिसकी अपील इतनी कारगर साबित हुयी है अगर वह खुद राजनीति का कीचड़ साफ करने उतरता है तो इसमें किसी समझदार भारतीय को आपत्ति नहीं होनी चाहिये । एक मामला और रामदेव जी ने पिछले लोकसभा चुनाव मे उठाया था । विदेशी बैंकों में जमा काले धन का । बाद मे बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया । बीजेपी चुनाव हार गयी और वह यह मुद्दा भी भूल गयी लेकिन रामदेवजी यह बात नहीं भूले थे । पिछले साल विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत लाने के लिये बाबा ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में पी आई एल दाखिल की जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है । इस वक्त बाबा से वही लोग डर रहे हैं जिनका पैसा विदेशी बैकों में जमा है या फिर जो बाबा के राजनीति में आने पर अपनी सड़ी हुयी राजनीति का बंटाधार होते हुये देख रहे हैं । 0933

के द्वारा: kmmishra kmmishra

के द्वारा:

के द्वारा: Jeevan Jyoti Jeevan Jyoti

के द्वारा:

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा: RaJ RaJ

के द्वारा:




latest from jagran