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RaJ


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Hello world!

Posted On: 14 Feb, 2010  
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जनरल डब्बा सोशल इश्यू में

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क्या अन्ना हमारे दौर के गांधी हैं ?JAGRAN JUNCTION FORUM

Posted On: 24 Aug, 2011  
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जनरल डब्बा में

24 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: shashibhushan1959

के द्वारा: raj

के द्वारा: raj

आप को ऐसा नही लगता की भारत भूमि के पानी में ही खराबी है । बिना पानी की औलादें पैदा किये जा रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता भैंस के समान हो गई है । पिछली बार अन्ना मुश्किल से उसे पानी के बाहर लाये थे । आज फिर पानी में बैठ गई । आप को ऐसा नही लगता की जनता गधे के समान हो गई है । रात दिन गधे की तरह काम करो, मेहंगाई, घूस देने के लिए थोडा और काम कर लो । दिन कट जाएंगे । आप को ऐसा नही लगता की जनता कुत्ते के समान हो गई है । मालिक बिस्किट फैंकता है तो कुत्ते सी वफादारी दिखने दौडता है । आज दिखा दिया कुत्तापन, अन्ना को कले झंडे दिखा कर । चायना में जब राजाशाही थी तब एक राजा मर गया । उस के ५ साल के बच्चे को राजा बना दिया । उस बालाराजा को ईत्र से भरे बर्तन में संडस आदी करवाया जाता था । बर्तन दरबार में धुमाया जाता था । सब दरबारी उसे सुंघते थे और अपनी वफादारी दिखाते थे । आप को ऐसा नही लगता की भारत का भी ऐसा ही हाल है । जनता जवाहरलाल के बच्चों का सब कुछ सुंघ रही है । आप को ऐसा नही लगता की जनता गुलाम है और उसे गुलाम ही रहने देना चाहिये । गुलामी के लायक ही है ।

के द्वारा: bharodiya

के द्वारा: akraktale

के द्वारा: राही अंजान

के द्वारा: Wrarlmill

के द्वारा: Wrarlmill

के द्वारा: Wrarlmill

के द्वारा: Wrarlmill

के द्वारा: Wrarlmill

सार्थक लेख सटीक बातें बेबाक राज जी ...अन्ना जी चाहे गांधी हों या न हों आज एक व्यक्ति सामने तो आया अपनी जान दांव पर लगाया सरकार भी जिसे गौर से परख रही अभी तक डंडा नहीं चला कुछ तो है लोग तो आरोप प्रत्यारोप करते ही रहते हैं जिसकी जान दांव पर लगी हो किडनी ख़राब हो सकती साँसे बंद हो सकती उस पर लोग विश्वास न कर कुछ कहें तो दर्द तो होता है ...एक अच्छे काम में सब को शामिल होना चाहिए आइये सब मिल आवाज बुलंद करते रहें भ्रमर ५ पर एक स्वतंत्र देश में जहाँ कोई व्यवस्था है वहां व्यक्तिगत अधिकारों की अवहेलना आज भी होगी | बात मनवाने के लिए भीड़ यूँ ही जुटानी पड़ी, एक वयो वृद्ध को संवेदना जुटाने केलिए अपनी जान को लगाना पढ़ जाये तो शर्म सरकार को ही नहीं सोई हुई जनता को भी आनी चाहिए |

के द्वारा: surendr shukla bhramar5

आदरणीय राज जी, सादर अभिवादन ! आपकी रचना का इंतज़ार रहता है और आप हर बार उन उम्मीदों से बेहतर कर देते हो । हालांकि इस बार इंतज़ार थोड़ा लंबा खिंच गया लेकिन परिणाम फिर वही....दिल खुश हो गया पंक्तियों को पढ़कर । इन पंक्तियों ने मुझे "दुष्यंत कुमार जी" की याद दिला दी । उनकी कुछ पंक्तियाँ मैं आपके इस प्रयास को समर्पित करना चाहूँगा.... . हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !! . . बहुत-बहुत आभार आपका !! :)

के द्वारा: संदीप कौशिक

प्रिय राजीव भाई बहुत ही विचारणीय प्रश्न और सुन्दर विषय युक्त आलेख जब तक जेब भरने का सिला यों ही चलता रहेगा उस पर अंकुश नहीं लगेगा एक तरफ भूखे दूसरी तरफ पकवान खा सब कुछ डकारते लोग रहेंगे किसको फुर्सत होगी देश भक्ति और जान माल की सुरक्षा की जब आराम से घर बैठे कमाई हो जाये तो कौन जाये इंटेलिजेंस में माथा खपा मरने के लिए बहुत सी जड़ें काटनी होंगी तब बात बनेगी यहाँ लड़ाई दो स्तरों पर लड़ी जानी एक उनसे जो लोग बहार से आकर लाशें बिछते रहते है और दुसरे हमारे अपने लोग है जिन्हें हमारे मतदान के ड्रामा के साथ चुना जाता है और वे हमारे हुक्मरान बनके हमें लुटते खसोटते है विचारणीय लेख बधाई भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

के द्वारा: anoop pandey

के द्वारा: raj

आदरणीय राज जी, सादर अभिवादन !! जैसा कि आपने भी कहा और मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि सत्य साई जी ने मानवता के लिए कई कार्य किए लेकिन स्वयं को भगवान बताकर और फिर इस बात को सिद्ध करने के लिए उन्होने जिस तरह से छल-प्रपंच, जादू एवं टोटकों का सहारा लिया वह वास्तव में निंदनीय है | अगर कोई सच में भगवान है तो फिर उसे इस तरह के क्रिया-कलापों का सहारा लेकर लोगों को मूर्ख बनाने की एवं उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने कि क्या आवश्यकता है ?? और फिर ऊपर से हमारी ये भोली भाली जनता....जो सच्चाई और बनावटीपन में फर्क नहीं कर सकती | आज जबकि ओर हम सब 21वीं सदी में जीने की बात कर रहें हैं, इस वैज्ञानिक युग में तरक्की की बात कर रहें हैं तो दूसरी ओर हमारा धार्मिक ( या यूं कहें कि आध्यात्मिक या भावनात्मक ) पक्ष इतना कमजोर क्यों है कि हम किसी साधारण आदमी को भगवान मान लेते हैं ?? आखिर इस सूचना-क्रान्ति के युग एवं तेजी से बदलते परिवेश में इतनी अंधी श्रद्धा का क्या औचित्य है जबकि वह सिर्फ एक विवाद-विषय के सिवा हमें कुछ नहीं दे सकती !! आभार सहित http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/

के द्वारा: संदीप कौशिक

के द्वारा: Saleem Khan

आपने बिलकुल ठीक कहा कि जो कुछ मनुष्य के अन्दर है उसे वह बहार ढूंढ़ रहा है | जो चीज बिना लोगों को गुमराह किये की जाये वह ज्यादा अच्छी है | डा प्रकाश आमटे जैसे लोगों ने धर्म को आगे करके न तो करोणों अरबों रूपये इकठे किये न ही खुद ऐशो आराम किया पर जो लोग उन्हें जानते है उन्होंने गोंड जनजाति को नेस्तनाबूद होने से बचा लिया | उन्हें जंगल से बहार समाज देखने के लिए आँखे दी | वे कपडे भी पूरी तरह नहीं पहनते थे उन्हें रहना सहना सिखाया चिकित्सा उपलब्ध कराई | इस सफ़र में उनका खुद का पुत्र मलेरिया ग्रस्त हो मौत का निवाला बन गया | पर डा दम्पति आज भी लगे है अपने उद्देश्य लगे है | पब्लिक को यहाँ कोई जादू देखने को नहीं मिलता कोई स्वर्ग नरक की बाते भी नहीं की जाती कोई कहानिया आशीर्वाद नहीं कोई पीछे घुमने वाला पहिया भी नहीं इसलिए कितने लोग जानते है ऐसे कामों को |

के द्वारा: RaJ

के द्वारा: Dr,Manoj Rastogi

जिनके पास किसी तरह से धन संपत्ति आ गयी है वह झमेले में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि उसको लगता है बेकार में क्यों फंसो जब देश चलाने वाले नेता और उच्चाधिकारी ही इतने भ्रष्ट हैं तो शिकायत कौन सुनेगा ? व्यवस्था पर पूर्ण अविश्वास की स्थिति है समाज में . इसलिए आर टी आई के आधार पर न्याय मांगना किसी हद तक तो इस भ्रष्ट तंत्र में स्वीकार्य होता है पर एक सीमा के बाद भ्रष्ट तंत्र आपको मृत्यु दंड दे ही देता है . यही स्थिति लगभग सभी कानूनी प्रावधानों के साथ है. ऍफ़ आई आर लिखाना तक मुश्किल होता है . तब सवाल है कि करें क्या ? कब घिसटते रहें इस तरह ? क्या चुप बाते रहें . नहीं! बिलकुल नहीं ! हमें आवाज़ से आवाज़ जोड़नी होगी, एक आन्दोलन खडा करना होगा व्यवस्था परिवर्तन के लिए . ..

के द्वारा: Rajeev Dubey

के द्वारा: Ramesh bajpai

मिश्रा जी धन्यवाद मैं जानता हूँ आलोचना करने वाला लेख को ज्यादा ध्यान से पड़ता है न कि प्रशंषा करने वाला अंध विश्वास व अंध श्रद्धा मैं अंतर मामूली है | आस्था वान होना अपने मैं बहुत बड़ा गुण है और जीवन को सरलता सुगमता से जीने का साधन भी | पर आस्था व्यक्ति दिमाग को तर्कों से दूर रखकर ही पैदा की जा सकती है | सुकरात को हमेशा परेशान व समस्याओं से घिरा देखकर व उनकी बैचेनी से उनके दोस्त सूअर के दिखाकर समझाने लगे कि तमाम गन्दगी मैं भी यह प्राणी कितना प्रसन्न है | सुकरात ने उनसे यही कहा कि मैं मन मैं अपने चिंतन से हमेशा परेशान हूँ पर बिना विचार वाली जिंदगी चाहे जितनी आराम वाली हो मुझे एक पल भी नहीं चाहिए | स्वदेश का अर्थ यदि अर्थव्यवस्था बाहरी प्रभाव मुक्त करने का है तो यह आत्मघाती होगा| बहार कि चीजो का स्थानीय विरोध व योग बहार बेचने का प्रोग्राम क्या दोहरे मापदंडो का परिचायक नहीं है | कोटि कोटि धन्यवाद

के द्वारा: Raj

बाबा रामदेव के नाम पर जागरण जंक्शन पर डाली गयी पोस्टें तुरंत हिट हो जा रही है । आपने भी बहती गंगा में मुंह हाथ घो लिया । बधाई । ये भारत के किस कानून में लिखा हुआ है कि कोई बाबा चुनाव नहीं लड़ सकता है । आपकी कलम तब तो लड़ सकता है । चुनाव लड़ना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है जैसे कि वोट देना । रामदेव जी के राजनीति में आने से बहुत लोगो को हार्दिक कष्ट हो रहा है लेकिन जब तमाम गुंडों और माफियों ने राजनीति का टिकट कटवाया था तब किसी ने चूं तक नहीं की थी । आपको शायद याद नहीं होगा । पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ रामदेव ने ही भारत की जनता से अपील की थी कि अपराधिक छवि वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट न दें । यह अपील किसी भी राजनैतिक पार्टी की तरफ से नहीं की गयी थी क्योंकि हर पार्टी में दागदार, अपराधिक छवि के नेता विराजते हैं । और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ एक रामदेवजी की अपील से इस लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुकाबले 25 प्रतिशत अपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या में कमी आयी है । जिसकी अपील इतनी कारगर साबित हुयी है अगर वह खुद राजनीति का कीचड़ साफ करने उतरता है तो इसमें किसी समझदार भारतीय को आपत्ति नहीं होनी चाहिये । एक मामला और रामदेव जी ने पिछले लोकसभा चुनाव मे उठाया था । विदेशी बैंकों में जमा काले धन का । बाद मे बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया । बीजेपी चुनाव हार गयी और वह यह मुद्दा भी भूल गयी लेकिन रामदेवजी यह बात नहीं भूले थे । पिछले साल विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत लाने के लिये बाबा ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में पी आई एल दाखिल की जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है । इस वक्त बाबा से वही लोग डर रहे हैं जिनका पैसा विदेशी बैकों में जमा है या फिर जो बाबा के राजनीति में आने पर अपनी सड़ी हुयी राजनीति का बंटाधार होते हुये देख रहे हैं ।

के द्वारा: kmmishra

बाबा रामदेव के नाम पर जागरण जंक्शन पर डाली गयी पोस्टें तुरंत हिट हो जा रही है । आपने भी बहती गंगा में मुंह हाथ घो लिया । बधाई । ये भारत के किस कानून में लिखा हुआ है कि कोई बाबा चुनाव नहीं लड़ सकता है । आपकी कलम तब तो लड़ सकता है । चुनाव लड़ना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है जैसे कि वोट देना । रामदेव जी के राजनीति में आने से बहुत लोगो को हार्दिक कष्ट हो रहा है लेकिन जब तमाम गुंडों और माफियों ने राजनीति का टिकट कटवाया था तब किसी ने चूं तक नहीं की थी । आपको शायद याद नहीं होगा । पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ रामदेव ने ही भारत की जनता से अपील की थी कि अपराधिक छवि वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट न दें । यह अपील किसी भी राजनैतिक पार्टी की तरफ से नहीं की गयी थी क्योंकि हर पार्टी में दागदार, अपराधिक छवि के नेता विराजते हैं । और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ एक रामदेवजी की अपील से इस लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुकाबले 25 प्रतिशत अपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या में कमी आयी है । जिसकी अपील इतनी कारगर साबित हुयी है अगर वह खुद राजनीति का कीचड़ साफ करने उतरता है तो इसमें किसी समझदार भारतीय को आपत्ति नहीं होनी चाहिये । एक मामला और रामदेव जी ने पिछले लोकसभा चुनाव मे उठाया था । विदेशी बैंकों में जमा काले धन का । बाद मे बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया । बीजेपी चुनाव हार गयी और वह यह मुद्दा भी भूल गयी लेकिन रामदेवजी यह बात नहीं भूले थे । पिछले साल विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत लाने के लिये बाबा ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में पी आई एल दाखिल की जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है । इस वक्त बाबा से वही लोग डर रहे हैं जिनका पैसा विदेशी बैकों में जमा है या फिर जो बाबा के राजनीति में आने पर अपनी सड़ी हुयी राजनीति का बंटाधार होते हुये देख रहे हैं । 0933

के द्वारा: kmmishra

के द्वारा: Raj

के द्वारा: Jeevan Jyoti

के द्वारा: suman

के द्वारा: महेश

के द्वारा: manish




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